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NEET-UG paper leak को लेकर चले करीब एक महीने के student protest के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस बीच BJP के एक वरिष्ठ नेता ने चौंकाने वाला दावा किया है कि प्रधान आंदोलन के पहले दिन से ही इस्तीफा देने के लिए तैयार थे, लेकिन पार्टी हाईकमान के दबाव में वे रुके रहे।
आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई
यह विरोध प्रदर्शन 20 जून को दिल्ली के Jantar Mantar से शुरू हुआ था, जब खुद को “कॉकरोच” कहने वाले युवाओं ने Cockroach Janta Party (CJP) के बैनर तले प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। यह पूरा आंदोलन राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत डिपके के एक व्यंग्यात्मक मीम पेज से शुरू हुआ था, जिसने बाद में देशभर में जोर पकड़ लिया।
शुरुआत में इसे एक सामान्य कैंपस विरोध माना जा रहा था, लेकिन जिस तरह से युवाओं ने इसे social media पर एक बड़े आंदोलन का रूप दिया, उसने बहुत जल्दी सरकार की चिंता बढ़ा दी।

वांगचुक की भूख हड़ताल ने बदली दिशा
आंदोलन को उस समय और गति मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। 18 जुलाई को जब वांगचुक को जबरन Safdarjung Hospital ले जाया गया, तो हजारों लोग इस आंदोलन से जुड़ गए। 20 जुलाई को हुए “Sansad Chalo” मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी संसद तक पहुंच गए, जिसके बाद पुलिस को tear gas का इस्तेमाल करना पड़ा।
यह प्रधानमंत्री Narendra Modi के तीसरे कार्यकाल का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है। युवा वर्ग को BJP का एक अहम वोट बैंक माना जाता रहा है, इसलिए यह आंदोलन पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील बन गया था।
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शुक्रवार तक इनकार, शनिवार को इस्तीफा
सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार शाम तक सरकार की ओर से यह साफ संकेत दिया जा रहा था कि प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, लेकिन शनिवार को स्थिति अचानक बदल गई। प्रधान ने खुद X (Twitter) पर अपना resignation letter प्रधानमंत्री मोदी को भेजने की जानकारी साझा की। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर और देश में जो हालात बने हैं, उसका फायदा राष्ट्र-विरोधी ताकतों को नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वे देश के युवाओं को भ्रम के दुष्चक्र में फंसने नहीं देंगे।
प्रधान का यह कदम इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि PM Modi दबाव में झुकने के लिए नहीं जाने जाते। लोकसभा में Leader of Opposition Rahul Gandhi ने शुक्रवार को ही साफ कह दिया था कि जब तक प्रधान को हटाया नहीं जाता, विपक्ष paper leak मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं करेगा।
पहले दिन से इस्तीफे का दावा
अब जो नया दावा सामने आया है, उसके मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान आंदोलन शुरू होते ही, यानी जून के अंतिम सप्ताह में ही, अपना पद छोड़ने का मन बना चुके थे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि प्रधान ने शुरुआती दौर में ही हाईकमान के सामने इस्तीफे की पेशकश रखी थी, लेकिन उस समय पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता था कि आंदोलनकारियों के दबाव में झुकते हुए दिखा जाए। इसी वजह से करीब एक महीने तक फैसला टलता रहा।
जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल
प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। “Inquilab Zindabad” और “Vande Mataram” के नारों के बीच छात्र संगठनों ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताया। Disha Students’ Organisation के छात्र कार्यकर्ता सार्थक ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताया, वहीं All India Students’ Federation (AISF) से जुड़े वैभव ने कहा कि छात्र वर्ग बेहद खुश है।
हालांकि छात्र नेताओं ने साफ किया कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और वे New Education Policy (NEP) तथा National Testing Agency (NTA) को खत्म करने की मांग पर अड़े रहेंगे।
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प्रधान का राजनीतिक कद
गौरतलब है कि 2021 से शिक्षा मंत्री रहे 57 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान BJP के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और उन्हें कभी पार्टी अध्यक्ष पद के लिए भी संभावित उम्मीदवार माना जाता रहा है। Modi government में किसी विवाद के चलते इस्तीफा देने वाले वे दूसरे मंत्री हैं — इससे पहले 2018 में M.J. Akbar ने #MeToo आरोपों के बाद विदेश राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले साल होने वाले राज्यों के चुनावों को देखते हुए भाजपा ने युवाओं की नाराजगी को समय रहते शांत करना ज्यादा जरूरी समझा।
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध news reports और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें शामिल कुछ दावे (जैसे “पहले दिन से इस्तीफे की पेशकश”) BJP के एक नेता के हवाले से बताए गए हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि पूर्ण और आधिकारिक जानकारी के लिए मूल source लिंक पर दी गई खबर जरूर पढ़ें।
